जो बच्चा बोलता तो-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

जो बच्चा बोलता तो-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

 

जो बच्चा बोलता तो
कहता!
है क्या आपके पास?
मेरे पास स्वप्न हैं तरह-तरह के।
फुटपाथ से लेकर घर तक।
दिल के अरमानों जैसे नक़्शों से
नक़्शे बनाऊँगा कोरे पन्नों पर।
मैं इनमें भरूँगा रंग।
सियाह सफेद रंगों से ही
सतरंगी झूला उकेरूँगा।
पिता जैसे
बेगाना जूता चमकाते हैं,
मैं अपना मस्तक चमकाऊंगा।
वक़्त आने दो,
कुछ करके दिखाऊँगा।
पर बच्चा बहुत भोला है,
नहीं जानता,
एकलव्य का अंगूठा
काटने की रीत
बहुत पुरानी है।
सावधान बच्चे!
जंग इतनी भी आसान नहीं।
दुश्मन पहले से भी
ख़तरनाक हो गया है।

 

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