जो खो जाता है मिलकर ज़िन्दगी में-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

जो खो जाता है मिलकर ज़िन्दगी में-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

जो खो जाता है मिलकर ज़िन्दगी में
ग़ज़ल है नाम उसका, शायरी में

निकल आते हैं आँसू हँसते-हँसते
ये किस ग़म की कसक है, हर ख़ुशी में

कहीं आँखें, कहीं चेहरा, कहीं लब
हमेशा एक मिलता है, कई में

चमकती है अँधेरों में खामोशी
सितारे टूटते हैं रात ही में

गुजर जाती है यूँ ही उम्र सारी
किसी को ढूँढ़ते हैं हम किसी में

सुलगती रेत में पानी कहाँ था
कोई बादल छुपा था तश्नगी में

बहुत मुश्किल है बंजारामिजाजी
सलीका चाहिए आवारगी में

(तश्नगी=प्यास, बंजारामिजाजी=
घुम्मकड़ स्वभाव)

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