जैसे हीरा हाथ मै तनक सो दिखायी देत-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे हीरा हाथ मै तनक सो दिखायी देत-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे हीरा हाथ मै तनक सो दिखायी देत
मोल कीए दमकन भरत भंडार जी ।
जैसे बर बाधे हुंडी लागत न भार कछु
आगै जाय पाईअत लछमी अपार जी ।
जैसे बटि बीज अति सूखम सरूप होत
बोए सै बिबिधि करै बिरखा बिसथार जी ।
तैसे गुर बचन सचन गुरसिखन मै
जानीऐ महातम गए ही हरिदुआर जी ॥३७३॥

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