जैसे सरि सरिता सकल मै समुन्द्र बडो-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे सरि सरिता सकल मै समुन्द्र बडो-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे सरि सरिता सकल मै समुन्द्र बडो
मेर मै सुमेर बडो जगतु बखान है ।
तरवर बिखै जैसे चन्दन बिरखु बडो
धात मै कनक अति उतम कै मान है ।
पंछियन मै हंस मृग राजन मै सारदूल
रागन मै सिरीरागु पारस पखान है ।
ग्यांनन मै ग्यानु अरु ध्यानन मै ध्यान गुर
सकल धरम मै ग्रेहसतु प्रधान है ॥३७६॥

Leave a Reply