जैसे मेघ बरखत हरखति है क्रिसानि-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे मेघ बरखत हरखति है क्रिसानि-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे मेघ बरखत हरखति है क्रिसानि
बिलख बदन लोधा लोन गरि जात है ।
जैसे परफुलत हुइ सकल बनासपती
सुकत जवासो आक मूल मुरझात है ।
जैसे खेत सरवर पूरन किरख जल
ऊच थल कालर न जल फलनात है ।
गुर उपदेस परवेस गुरसिख रिदै
साकत सकति मति सुनि सकुचात है ॥५१८॥

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