जैसे बिनु पवनु कवन गुन चन्दन सै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे बिनु पवनु कवन गुन चन्दन सै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे बिनु पवनु कवन गुन चन्दन सै
बिनु मल्यागर पवन कत बासि है ।
जैसे बिनु बैद अवखद गुन गोपि होत
अवखद बिनु बैद रोगह न ग्रास है ।
जैसे बिनु बोहथन पारि परै खेवट सै
खेवट बेहून्न कत बोहथ बिस्वासु है ।
तैसे गुर नामु बिनु गंम न परमपदु
बिनु गुर नाम नेहकाम न प्रगास है ॥५१६॥

Leave a Reply