जैसे पेखै सयाम घटा गगन घमंड घोर-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे पेखै सयाम घटा गगन घमंड घोर-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे पेखै सयाम घटा गगन घमंड घोर
मोर औ पपीहा सुभ सबद सुनावही ।
जैसे तौ बसंत समै मौलत अनेक आंब
कोकला मधुर धुनि बचन सुनावही ।
जैसे परफुलत कमल सरवरु विखै
मधुप गुंजारत अनन्द उपजावही ।
तैसे पेख स्रोता सावधानह गायन गावै
प्रगटै पूरन प्रेम सहजि समावही ॥५६७॥

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