जैसे धोभी साबन लगाय पीटै पाथर सै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे धोभी साबन लगाय पीटै पाथर सै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे धोभी साबन लगाय पीटै पाथर सै
निरमल करत है बसन मलीन कउ ।
जैसे त सुनार बारम्बार गार गार ढार ।
करत असुध सुध कंचन कुलीन कउ ।
जैसे तउ पवन झकझोरत बिरख मिल
मलय गंध करत है चन्दन प्रबीन कउ ।
तैसे गुर सिखन दिखायकै ब्रिथा बिबेक
माया मल काटिकरै निज पद चीन कउ ॥६१४॥

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