जैसे जैसे रंग संगि मिलत सेतांबर हुइ-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे जैसे रंग संगि मिलत सेतांबर हुइ-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे जैसे रंग संगि मिलत सेतांबर हुइ
तैसे तैसे रंग अंग अंग लपटाय है ।
भगवत कथा अरपन कउ धारनीक
लिखत क्रितास पत्र बंध मोखदाय है ।
सीत ग्रीखमादि बरखा बरख मै
निसि दिन होइ लघु दीरघ दिखाय है ।
तैसे चित चंचल चपल पउन गउन गति
संगम सुगंध बिरगंध प्रगटाय है ॥१५६॥

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