जैसे चूनो खांड स्वेत एकसे दिखायी देत ।-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे चूनो खांड स्वेत एकसे दिखायी देत ।-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे चूनो खांड स्वेत एकसे दिखायी देत ।
पाईऐ तौ स्वाद रस रसना कै चाखीऐ ।
जैसे पीत बरन ही हेम अर पीतर ह्वै
जानीऐ महत पारखद अग्र राखीऐ ।
जैसे कऊआ कोकिला है दोनो खग सयाम तन
बूझीऐ असुभ सुभ सबद सु भाखीऐ ।
तैसे ही असाध साध चेहन कै समान होत ।
करनी करतूत लग लछन कै लाखीऐ ॥५९६॥

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