जैसे करपूर मै उडत को सुभाउ ताते-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे करपूर मै उडत को सुभाउ ताते-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे करपूर मै उडत को सुभाउ ताते
अउर बासना न ताकै आगै ठहारवयी ।
चन्दन सुबास कै सुबासना बनासपती
ताही ते सुगंधता सकल सै समावयी ।
जैसे जल मिलत स्रबंग संग रंगु राखै
अगन जराय सब रंगनु मिटावयी ।
जैसे रवि ससि सिव सकत सुभाव गति
संजोगी ब्योगी द्रिसटातु कै दिखावयी ॥१३४॥

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