जैसी मै आवै खसम की बाणी तैसड़ा करी गिआनु वे लालो-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

जैसी मै आवै खसम की बाणी तैसड़ा करी गिआनु वे लालो-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

जैसी मै आवै खसम की बाणी तैसड़ा करी गिआनु वे लालो ॥
पाप की जंञ लै काबलहु धाइआ जोरी मंगै दानु वे लालो ॥
सरमु धरमु दुइ छपि खलोए कूड़ु फिरै परधानु वे लालो ॥
काजीआ बामणा की गल थकी अगदु पड़ै सैतानु वे लालो ॥
मुसलमानीआ पड़हि कतेबा कसट महि करहि खुदाइ वे लालो ॥
जाति सनाती होरि हिदवाणीआ एहि भी लेखै लाइ वे लालो ॥
खून के सोहिले गावीअहि नानक रतु का कुंगू पाइ वे लालो ॥१॥
साहिब के गुण नानकु गावै मास पुरी विचि आखु मसोला ॥
जिनि उपाई रंगि रवाई बैठा वेखै वखि इकेला ॥
सचा सो साहिबु सचु तपावसु सचड़ा निआउ करेगु मसोला ॥
काइआ कपड़ु टुकु टुकु होसी हिदुसतानु समालसी बोला ॥
आवनि अठतरै जानि सतानवै होरु भी उठसी मरद का चेला ॥
सच की बाणी नानकु आखै सचु सुणाइसी सच की बेला ॥२॥३॥५॥(722)॥

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