जूठि न रागीं जूठि न वेदीं-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

जूठि न रागीं जूठि न वेदीं-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

जूठि न रागीं जूठि न वेदीं ॥
जूठि न चंद सूरज की भेदी ॥
जूठि न अंनी जूठि न नाई ॥
जूठि न मीहु वर्हिऐ सभ थाई ॥
जूठि न धरती जूठि न पाणी ॥
जूठि न पउणै माहि समाणी ॥
नानक निगुरिआ गुणु नाही कोइ ॥
मुहि फेरिऐ मुहु जूठा होइ ॥१॥1240)॥

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