जु्ध जिते इन ही के प्रसादि-गुरू गोबिन्द सिंह जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Gobind Singh Ji 

जु्ध जिते इन ही के प्रसादि- गुरू गोबिन्द सिंह जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Gobind Singh Ji

जु्ध जिते इन ही के प्रसादि इन ही के प्रसादि सु दान करे ॥
अघ अउघ टरै इन ही के प्रसादि इन ही क्रिपा फुन धाम भरे ॥
इन ही के प्रसादि सु बि्दिआ लई इन ही की क्रिपा सभ श्त्रु मरे ॥
इन ही की क्रिपा के सजे हम हैं नही मोसो गरीब करोर परे ॥२॥

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