जुबां को ताड़ना-नानक सिंह -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nanak Singh

जुबां को ताड़ना-नानक सिंह -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nanak Singh

ऐ जुबां खामोश वरना काट डाली जाएगी।
खंजर-ए-डायर से बोटी छांट डाली जाएगी।

चापलूसी छोड़कर गर कुछ कहेगी, साफ तू,
इस खता में मुल्क से फौरन निकाली जाएगी।

देख गर चाहेगी अपने हमनशीनों का भला,
बागियों की पार्टी में तू भी डाली जाएगी।

गर इरादा भी किया आजाद होने के लिए,
मिसले अमृतसर मशीन-ए-गन मंगा ली जाएगी।

गर जरा सी की खिलाफत तू ने रौलट बिल की,
मार्शल लॉ की दफा तुम पर लगा दी जाएगी।

मानना अपने ना हरगिज़ लीडरों की बात तू
वरना सीने पे तेरे मारी दुनाली जाएगी।

खादिमाने मुल्क की मजलस में गर शिरकत हुई,
दी सजा जलियां वाले बाग वाली जाएगी।

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