जुग जुग मेर सरीर का बाशना बद्धा आवै जावै ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

जुग जुग मेर सरीर का बाशना बद्धा आवै जावै ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जुग जुग मेर सरीर का बाशना बद्धा आवै जावै ॥
फिर फिर फेर वटाईऐ ग्यानी होइ मरम को पावै ॥
सतिजुग दूजा भरम कर त्रेते विच जोनी फिर आवै ॥
त्रेते करमां बांधते दुआपर फिर अवतार करावै ॥
दुआपर ममता अहंकार हउमैं अन्दर गरबि गलावै ॥
त्रेहु जुगां के करम कर जनम मरन संसा न चुकावै ॥
फिर कलिजुग अन्दर देह धर करमां अन्दर फेर वसावै ॥
अउसर चुका हथ न आवै ॥15॥

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