जुगगरदी जब होवहे उलटे जुग क्या होइ वरतारा ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

जुगगरदी जब होवहे उलटे जुग क्या होइ वरतारा ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जुगगरदी जब होवहे उलटे जुग क्या होइ वरतारा ॥
उठे गिलान जगत विच वरतै पाप भ्रशट संसारा ॥
वरना वरन न भावनी खह खह जलन बांस अंगयारा ॥
निन्दा चालै वेद की समझन नह अग्यान गुबारा ॥
बेद ग्रंथ गुर हट्ट है जिस लग भवजल पार उतारा ॥
सतिगुर बाझ न बुझीऐ जिचर्र धरे न गुर अवतारा ॥
गुर परमेशर इक है सच्चा शाह जगत वणजारा ॥
चड़े सूर मिट जाय अंधारा ॥17॥

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