जीवन बीत चला-अनुभूति के स्वर-मेरी इक्यावन कविताएँ -अटल बिहारी वाजपेयी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

जीवन बीत चला-अनुभूति के स्वर-मेरी इक्यावन कविताएँ -अटल बिहारी वाजपेयी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

जीवन बीत चला

कल कल करते आज
हाथ से निकले सारे
भूत भविष्य की चिंता में
वर्तमान की बाज़ी हारे
पहरा कोई काम न आया
रसघट रीत चला
जीवन बीत चला

हानि लाभ के पलड़ों में
तुलता जीवन व्यापार हो गया
मोल लगा बिकने वाले का
बिना बिका बेकार हो गया
मुझे हाट में छोड़ अकेला
एक एक कर मीत चला
जीवन बीत चला

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