जीवन-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal 

जीवन-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal

तुम इतनी सुन्दर हो कि
आँखें तुम पर से हटती नहीं हैं
उम्र चाहे जो भी हो
तुम्हारे बिना कटती नहीं है

बीते दिन आज भी मन कुरेदती हैं
जब तुम कंधे से टिकी होती थी
तुम्हे छू कर सारे दुःख सिमट जाते थे
आँखों में ही सुबह से शाम हो जाती थी

याद है जब तुम्हे देख नहीं पाते थे
तो सारा दिन कल में ही जी लेते
ईश्वर से तुम्हे हर पल मांगते
और अकेले में निःशब्द ही रो लेते

कभी मन की बात कागज़ पर लिखते
कभी उस पर ही नीर बहा लेते
तुम्हारी प्रतीक्षा में कभी मन बहल जाता
फिर भी तुम नहीं आती, अँधेरा सहा करते

कितना कठिन था तुमसे बिछुड़ना
लगता जैसे जीवन झुलस गया हो
जब तुम लौट आती तो आभास होता
फिर मौसम जैसे गुलाबी हो गया हो

तुम्हारे बिना कैसे होगा कल
अब सम्हलता नहीं मेरा मन है
तुम हो तो ये दिन-रात हैं
स्पर्श है, प्यार है, उससे बना जीवन है

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