जीतने की ज़िद-ज़हीर अली सिद्दीक़ी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Zahir Ali Siddiqui

जीतने की ज़िद-ज़हीर अली सिद्दीक़ी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Zahir Ali Siddiqui

 

ऐ शिकारी! याद रख
तरकशों के तीर को
तीर से तक़रार अक्सर
रोक देती जीत को।।

गिर गया तो क्या हुआ
उठना यदि मालूम है
हार अक्सर जंग में
जीत की एक चाल है।।

ठहरने की ख्वाहिशें
गिरने की आहट सदा
गिरने से गिरेबान भी
दिखता नही इंसान को ।।

ज़िन्दगी का सफ़र भी
कठिन होना चाहिए
कठिनाइयों के की मार से
मजबूत होना चाहिए।।

जीतने की ज़िद सदा
लत लगाती जीत की
हार भी फ़रार होती
ज़िद के हाहाकार से।।

 

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