जिस ख़ित्ते में हम कहते थे-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

जिस ख़ित्ते में हम कहते थे-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

जिस ख़ित्ते में हम कहते थे आना येह वुही है ।
कल लुट के है जिस जगह से जाना येह वुही है ।
जिस जा पि है बच्चों को कटाना येह वुही है ।
मट्टी कह देती है ठिकाना येह वुही है ।
इक मोर्चे में फिर वहीं सरकार दर आए ।

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