जिस दिल को नहीं इश्क-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

जिस दिल को नहीं इश्क-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

जिस दिल को नहीं इश्क-ए-हकीकी से सरोकार ।
पत्थर का वुह टुकड़ा है वुह दिल तो नहीं ज़िनहार ।
ख़ालिक का प्यारा है जो ख़लकत को करे प्यार ।
इतना है फ़कत काफ़िर-ओ-दींदार का मअयार ।
सिक्खी भी सिखाती है फ़ना ज़ात में हो जा ।
पैरो गुरू नानक का हर इक बात में हो जा ।

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