जिस दिन तेरी याद न आई-दर्द दिया है-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

जिस दिन तेरी याद न आई-दर्द दिया है-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

सुबह न आई, शाम न आई, जिस दिन तेरी याद न आई !

जिस दिन तड़पे प्राण न उस दिन
देह लगी मिट्टी की ढेरी,
जिस दिन सिसकी साँस न उस दिन,
उम्र हो गई कुछ कम मेरी,
बरसी जिस दिन आँख न, उस दिन
गीत न बोले, अधर न डोले,

हँसी बिकाई, खुशी बिकाई, जिस दिन तेरी याद न आई !
सुबह न आई, शाम न आई, जिस दिन तेरी याद न आई !

धुँधलाया सूरज का दर्पण,
कजलाई चन्दा की बेंदी,
मूक हुई दुपहर की पायल,
रूठ गई संध्या की मेंहदी,
दिवस-रात सब लगे पराए,
लुटे-लुटाए स्वप्न-सितारे,
छटा न छाई, घटा न छाई, जिस दिन तेरी याद न आई!!
सुबह न आई, शाम न आई, जिस दिन तेरी याद न आई !

फिरते रहे नयन बौराये
कभी भवन में, कभी भुवन में,
रही कसकती पीड़ा कोई,
इस क्षण तन में, उस क्षण मन में
जग-जगकर काजल अलसाया,
चल-चलकर अंचल थक आया,

हाट न पाई, बाट न पाई, जिस दिन तेरी याद न आई!!
सुबह न आई, शाम न आई, जिस दिन तेरी याद न आई !

गुमसुम बैठी रही देहरी,
ठिठका-ठिठका आंगन द्वारा,
सेज लगी काँटों की साड़ी
और अटारी कज्जल-कारा,
अगरु-गंध हिम-लहर हो गई,
चन्दन-लेप ताप तक्षक का,

धूप न भाई, छाँह न भाई, जिस दिन तेरी याद न आई!!
सुबह न आई, शाम न आई, जिस दिन तेरी याद न आई !

गली-गली ने आंखें फेरीं,
गाँव-गाँव ने पत्थर मारे,
फूल-फूल ने धूल उड़ाई
शूल-शूल ने धाव उघारे,
गई जहाँ भी सांस गई-
ठुकराई हर घर से, हर दर से!

दुनिया ने दुश्मनी निभाई, जिस दिन तेरी याद न आई!!
सुबह न आई, शाम न आई, जिस दिन तेरी याद न आई !

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