जिस दम अनन्दपुर में -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

जिस दम अनन्दपुर में -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

जिस दम अनन्दपुर में सतिगुर मुकीम थे ।
हमगाह घर के लोग थे और कुछ नदीम थे ।
चारों तरफ़ से किले को घेरे ग़नीम थे ।
टोटे से रिज़क के दिल-ए-सिंघां दो-नीम थे ।
प्यासे थे और भूख की शिद्दत कमाल थी ।
थी मुख़्तसर सी फ़ौज सो वुह भी निढाल थी ।

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