जिस्म की भूख कहें या हवस का ज्वार कहें- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

जिस्म की भूख कहें या हवस का ज्वार कहें- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

जिस्म की भूख कहें या हवस का ज्वार कहें ।
सतही जज़्बे को मुनासिब नहीं है प्यार कहें ।

बारहा फ़र्द की अज़्मत ने जिसे मोड़ दिया,
हम भला कैसे उसे वक़्त की रफ़्तार कहें ।

जलते इन्सान की बदबू से हवा बोझल है,
फिर भी इसरार है मौसम को ख़ुशगवार कहें ।

आर्मस्ट्राँग तो कहता है चाँद पत्थर है,
दौरे-हाज़िर में किसे हुस्न का मेयार कहें ।

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