जिससे ये तबियत बड़ी मुश्किल से लगी थी-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

जिससे ये तबियत बड़ी मुश्किल से लगी थी-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

जिससे ये तबियत बड़ी मुश्किल से लगी थी
देखा तो वो तस्वीर हर एक दिल से लगी थी
तनहाई में रोते हैं कि यूँ दिल को सुकूँ हो
ये चोट किसी साहिबे-महफ़िल से लगी थी

ऐ दिल तेरे आशोब ने फिर हश्र जगाया
बे-दर्द अभी आँख भी मुश्किल से लगी थी

ख़िलक़त का अजब हाल था उस कू-ए-सितम में
साये की तरह दामने-क़ातिल से लगी थी

उतरा भी तो कब दर्द का चढ़ता हुआ दरिया
जब कश्ती-ए-जाँ मौत के साहिल से लगी थी

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