जिसदिन मुझसे मिलोगे राम सारा दर्द सुना दूंगा-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

जिसदिन मुझसे मिलोगे राम सारा दर्द सुना दूंगा-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

जिसदिन मुझसे मिलोगे राम सारा दर्द सुना दूंगा।
ज़ुबां न कुछ बोलेंगी आंखों से हाल बता दूंगा।।

आंखों से जब आंसू गिरते, तेरी बिरह सताती है।
सांसे माला जप दे तेरी, तो मीरा सी बन जाती हैं।।
हे सुन लो शबरी जैसे मिलना, तो सुदामा जैसे रुला दूंगा।।

जिस दिन मुझसे मिलोगे राम, सारा दर्द सुना दूंगा।
जु़बां न कुछ बोलेंगी आंखों से हाल बता दूंगा ।।

मंदिर में तेरे आता हूं, तुझसे आस लगाता हूं ।
सामने मूरत तेरी देखूं , तुझमें रम मैं जाता हूं। ।
हे सुनो जो डूबी मेरी नैया, तो इल्जाम तुझपे लगा दूंगा ।।

जिस दिन मुझसे मिलोगे राम सारा दर्द सुना दूंगा।
जु़बां न कुछ बोलेंगी आंखों से हाल बता दूंगा।।

विरह वेदना है तेरी, बोलो अब क्या कर जाऊं।
आके मुझसे मिले न राम, चौखट पे तेरे मै मर जाऊं।
हे दीन दयाल दया के सागर, तुझपे ही जीवन लुटा दूंगा।

जिसदिन मुझसे मिलोगे राम सारा दर्द सुना दूंगा
जु़बा न कुछ बोलेंगी आंखों से हाल बता दूंगा।।

 

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