जिसका जैसा धर्म, उसे मिले उसी का सहारा-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

जिसका जैसा धर्म, उसे मिले उसी का सहारा-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

जागो देश वासियो लेकर राष्ट्र का नारा।
जिसका जैसा धर्म, उसे मिले उसी का सहारा।।

आतंकवाद बढ़ने लगा है,
पाक के सहयोग की वजह से
आई. एस. आई. की सत्ता है,
तालिबान की आहट की वजह से
26/11 हमले का
असर अब नहीं दिखा
ऐसा न हो इसलिए
दुनिया को समझा डालो
ऐ दिल्ली के वीर जवानो,
अब आतंक मिटा डालो।

स्हनशीलता की एक हद है,
उन विधवाओं को बतला डालो
सीमा पर जो शीश सुरक्षित
उनको वापस ला डालो
हजारों भगत सिंह हैं,
यह दुनिया को दिखला डालो।
ऐ दिल्ली के वीर जवानों,
अब आतंक मिटा डालो।

अमेरिका को चोट लगी तो,
लादेन को उसने मिटा डाला
भारत के जख्मों पर उसने
नजर नहीं अब तक डाला
सीने में है लहू भारत का,
अन्तिम बिगुल बजा डालो।
ऐ दिल्ली के वीर जवानों,
अब आतंक मिटा डालो।

 

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