जिना अंदरि दूजा भाउ है-श्लोक -गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

जिना अंदरि दूजा भाउ है-श्लोक -गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

जिना अंदरि दूजा भाउ है तिन्हा गुरमुखि प्रीति न होइ ॥
ओहु आवै जाइ भवाईऐ सुपनै सुखु न कोइ ॥
कूड़ु कमावै कूड़ु उचरै कूड़ि लगिआ कूड़ु होइ ॥
माइआ मोहु सभु दुखु है दुखि बिनसै दुखु रोइ ॥
नानक धातु लिवै जोड़ु न आवई जे लोचै सभु कोइ ॥
जिन कउ पोतै पुंनु पइआ तिना गुर सबदी सुखु होइ ॥2॥316॥

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