जितने हरामख़ोर थे कुर्बो-जवार में- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

जितने हरामख़ोर थे कुर्बो-जवार में- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

जितने हरामख़ोर थे कुर्बो-जवार में
परधान बन के आ गए अगली कतार में

दीवार फाँदने में यूँ जिनका रिकॉर्ड था
वे चौधरी बने हैं उमर के उतार में।

जब दस मिनट की पूजा में घंटों गुजार दें
समझो कोइ गरीब फंसा है शिकार में

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