जिउ पसरी सूरज किरणि जोति-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

जिउ पसरी सूरज किरणि जोति-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

जिउ पसरी सूरज किरणि जोति ॥
तिउ घटि घटि रमईआ ओति पोति ॥१॥
एको हरि रविआ स्रब थाइ ॥
गुर सबदी मिलीऐ मेरी माइ ॥१॥ रहाउ ॥
घटि घटि अंतरि एको हरि सोइ ॥
गुरि मिलिऐ इकु प्रगटु होइ ॥२॥
एको एकु रहिआ भरपूरि ॥
साकत नर लोभी जाणहि दूरि ॥३॥
एको एकु वरतै हरि लोइ ॥
नानक हरि एको करे सु होइ ॥੪॥੧॥੧੧੭੭॥

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