जाने से पहले आओ-शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

जाने से पहले आओ-शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

“जाने से पहले आओ गले से लगा तो लूं ।
केसों को कंघी कर दूं ज़रा मूंह धुला तो लूं ।
प्यारे सरों पे नन्ही सी कलग़ी सजा तो लूं ।
मरने से पहले तुम को मैं दूल्हा बना तो लूं ।”
रो रो के मात गुजरी ने आरासता किया ।
तीर-ओ-कमां से, तेग़ से पैरासता किया ।

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