जाग लेहु रे मना जाग लेहु कहा गाफल सोइआ- शब्द- -गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

जाग लेहु रे मना जाग लेहु कहा गाफल सोइआ- शब्द- -गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

जाग लेहु रे मना जाग लेहु कहा गाफल सोइआ ॥
जो तनु उपजिआ संग ही सो भी संगि न होइआ ॥1॥रहाउ॥
मात पिता सुत बंध जन हितु जा सिउ कीना ॥
जीउ छूटिओ जब देह ते डारि अगनि मै दीना ॥1॥
जीवत लउ बिउहारु है जग कउ तुम जानउ ॥
नानक हरि गुन गाइ लै सभ सुफन समानउ ॥2॥2॥726॥

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