जागो जागो बुंदेलखंड जागो-उमेश शुक्ल -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Shukla

जागो जागो बुंदेलखंड जागो-उमेश शुक्ल -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Shukla

जागो जागो बुंदेलखंड जागो
जागो जागो बुंदेली युवा जागो
हाथ दोनों उठाके राज मांगो
बदलो तदवीर से अपनी किस्मत
छोड़ दो मौन रहने की आदत
गरजना करके हक अपने मांगो
जागो जागो बुंदेलखंड जागो
जागो जागो बुंदेली युवा जागो

आजादी का जश्न मनाते गुजरे सालोंसाल
पर देखो बुंदेलखंड को है कितना बदहाल
लुट रहा यहां का खजाना
लखनउ को है तनिक फिक्र ना
आल्हा उदल की संतति हो तुम
सोचकर भीरूता मन के त्यागो
जागो जागो बुंदेलखंड जागो
जागो जागो बुंदेली युवा जागो
नेता अफसर दोनों यहां पे हो रहे मालामाल
छाती चीरकर इस धरती को बना रहे कंगाल
तंत्र यहां का गूंगा बहरा
बस कागज पर देता पहरा
अपनी किस्मत स्वयं रचेंगे
अब यह प्रण लेकर जागो
जागो जागो बुंदेलखंड जागो
जागो जागो बुंदेली युवा जागो
वर्षों से चल रही सियासत
बदल रही ना क्षेत्र की किस्मत
नेताओं की दोहरी चाल
बुंदेली जन जन है बेहाल
राहत के जो पैकेज आए

अब उनका हिसाब मांगो
जागो जागो बुंदेलखंड जागो
जागो जागो बुंदेली युवा जागो
सूखा जब जब यहां मंडराए
नेता अफसर प्लेन से आए
राहत का करने ऐलान
हो जाते सब अंतरध्यान
पुनरावृत्ति न हो इन सबकी
यही सोचकर राज मांगो
जागो जागो बुंदेलखंड जागो
जागो जागो बुंदेली युवा जागो
गर जो जागे नहीं समझ लो
प्रबल भंवर में तुम्ही घिरोगे
मौन रहे थे क्यों हम अब तक
यही सोच सिर अपना धुनोगे
भावी पीढ़ी के हित खातिर
उठो जगाओ दूजो को औ अपनी तंद्रा त्यागो
जागो जागो बुंदेलखंड जागो
जागो जागो बुंदेली युवा जागो

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