जागो जागो जागते रहो-हू-तू-तू-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar 

जागो जागो जागते रहो-हू-तू-तू-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar

जागो जागो जागते रहो हे
जागो जागो जागते रहो
रातों का हमला है
जागो जागो जागते रहो हे
जागो जागो जागते रहो

मकड़ी के जाले हैं
अंधेरे पाले हैं
चन्द लोगों ने
जागो जागो जागते रहो हे
जागो जागो जागते रहो

फिर गिरी गर्दन सर कटने लगे हैं
लोग बंटते ही ख़ुदा बंटने लगे हैं
नाम जो पूछे कोई डर लगता है
अब किसे पूछे कोई डर लगता है
कितनी बार मुझे सूली पे टांगा है
चन्द लोगों ने
जागो जागो जागते रहो हे
जागो जागो जागते रहो

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