जागति जोत जपै निस बासुर- गुरू गोबिन्द सिंह जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Gobind Singh Ji 

जागति जोत जपै निस बासुर-गुरू गोबिन्द सिंह जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Gobind Singh Ji

जागति जोत जपै निस बासुर एक बिना मन नैक न आनै ॥
पूरन प्रेम प्रतीत सजै ब्रत गोर मड़ी मट भूल न मानै ॥
तीरथ दान दइआ तप संजम एक बिना नह एक पछानै ॥
पूरन जोत जगै घट मै तब खालस ताहि नखालस जानै ॥१॥

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