ज़ुलमात में रोशन वो सितारा हैं आप-ग़ज़लें-ख़याल लद्दाखी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Khayal Ladakhi

ज़ुलमात में रोशन वो सितारा हैं आप-ग़ज़लें-ख़याल लद्दाखी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Khayal Ladakhi

ज़ुलमात में रोशन वो सितारा हैं आप
अल्लाह की क़ुदरत का नज़ारा हैं आप
रग रग में मिरी आप का दम दौड़े है
गुज़री है मिरी ख़ूब गुज़ारा हैं आप

(‘Rubaayi dedicated to my Dad’-Khayal Ladakhi
(27 May 1936-10 Aug 2008) on Fathers Day

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