ज़िन्दगी तनहा सफ़र की रात है-ग़ज़लें(तन्हा सफ़र की रात)-जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar

ज़िन्दगी तनहा सफ़र की रात है-ग़ज़लें(तन्हा सफ़र की रात)-जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar

ज़िन्दगी तनहा सफ़र की रात है
अपने-अपने हौसले की बात है

किस अक़ीदे की दुहाई दीजिए
हर अक़ीदा1 आज बेऔक़ात है

क्या पता पहुँचेंगे कब मंज़िल तलक
घटते-बढ़ते फ़ासले का साथ है

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