ज़िक्र-ए-गुल हो ख़ार की बातें करें-शायद-ग़ज़लें-जौन एलिया -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaun Elia 

ज़िक्र-ए-गुल हो ख़ार की बातें करें-शायद-ग़ज़लें-जौन एलिया -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaun Elia

ज़िक्र-ए-गुल हो ख़ार की बातें करें
लज़्ज़त-ओ-आज़ार की बातें करें

है मशाम-ए-शौक़ महरूम-ए-शमीम
ज़ुल्फ़-ए-अम्बर-बार की बातें करें

दूर तक ख़ाली है सहरा-ए-नज़र
आहू-ए-तातार की बातें करें

आज कुछ ना-साज़ है तब-ए-ख़िरद
नर्गिस-ए-बीमार की बातें करें

यूसुफ़-ए-कनआँ’ का हो कुछ तज़्किरा
मिस्र के बाज़ार की बातें करें

आओ ऐ ख़ुफ़्ता-नसीबो मुफ़लिसो
दौलत-ए-बेदार की बातें करें

‘जौन’ आओ कारवाँ-दर-कारवाँ
मंज़िल-ए-दुश्वार की बातें करें

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