ज़ख़्म-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

ज़ख़्म-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

अगर जख्म को वो हवा दे रहे हैं
तो उनको कहो हम दुआ दे रहे हैं

सुनो दर्द के हैं यूँ शौकीन हम तो
है अच्छा कि वो दर्द नया दे रहे हैं

घुटा रह गया मेरे अंदर का इन्सां
मेरी रूह को यूँ.. हवा दे रहे हैं

मेरी मौत मांगी दुआ में जिन्होंने
मेरी चोट को वो.. दवा दे रहे हैं

मेरे जीतेजी मुझको मारा जिन्होंने
मेरी कब्र को वो क्या क्या दे रहे हैं

खुदा मानकर था जिन्हें हमने चाहा
वफ़ा की वो मुझको सजा दे रहे हैं

शिकायत नहीं ‘प्रफुल्ल’ लोगों से मुझको
दगाबाज़ हैं सब दगा दे रहे हैं..!!

 

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