जवानी-मनुष्य जीवन के रंग-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

जवानी-मनुष्य जीवन के रंग-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

बना है अपने आलम में वह कुछ आलम जवानी का।
कि उम्रे खिज्र से बेहतर है एक एक दम जवानी का॥

नहीं बूढ़ों की दाढ़ी पर मियां यह रंग बिस्मे का।
किया है उनके एक एक बाल ने मातम जवानी का॥

यह बूढ़े गो कि अपने मुंह से शेख़ी में नहीं कहते।
भरा है आह पर इन सबके दिल में ग़म जवानी का॥

यह पीराने जहां इस वास्ते रोते हैं अब हर दम।
कि क्या-क्या इनका हंगामा हुआ बरहम जवानी का॥

किसी की पीठ कुबड़ी को भला ख़ातिर में क्या लावे।
अकड़ में नौ जवानों के जो मारे दम जवानी का॥

शराबो गुलबदन साक़ी मजे़ ऐशोतरब हर दम।
बहारे जिन्दगी कहिये तो है मौसम जवानी का॥

”नज़ीर“ अब हम उड़ाते हैं मजे़ क्या-क्या अहा! हा! हा
बनाया है अजब अल्लाह ने आलम जवानी का॥

 

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