जल्लाद से-शहीद भगत सिंह-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem|Kavita Shaheed Bhagat Singh 

जल्लाद से-शहीद भगत सिंह-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem|Kavita Shaheed Bhagat Singh

लगा कर फांसी ही क्या मान होगा,
रहे याद, तू भी सदा परेशान होगा ।

अगर जान मांगी तो क्या तुमने मांगा,
मेरी जान से तुझ को नुकसान होगा ।

लगा ले तू फांसी करो शाद दिल निज,
यह तेरे ही रोने का सामान होगा ।

नहीं होगा इस से अमन तू याद रखना,
तेरा तंग हर दम यहां औसान होगा ।

हम आते हैं लेकर जन्म फिर दुबारा,
वही संग में बम का सब सामान होगा ।

दलेंगे हम छाती पै फिर मूंग तेरी,
उसी बम का हर जगह पे व्याख्यान होगा ।

हमें आशा पूरी नजर आ रही है,
कि कुछ दिन का तू और महमान होगा ।

चढ़ा दे तू फांसी समझ हम को कांटा,
स्वर्ग का हमें यह तो ब्यान होगा ।

सफल हुआ उसका जन्म लेना जहाँ में,
जो अपने वतन पे यूं कुर्बान होगा ।

अमर यहाँ पे कब तक तुम रहोगे,
आखिर तो प्राणों का अवसान होगा ।

सुनो आज भारत के तुम नौजवानो,
मेरे बाद तुम्हारा भी इम्तिहान होगा ।

यह व्यर्य नहीं जाएगा खून हमारा,
“सव्तंतर” इसी विधि से हिन्दुस्तान होगा ।

(श्रीयुत प्रताप सव्तंतर)

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