जय हिन्द हिन्द, जय हिन्द हिन्द-हू-तू-तू-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar 

जय हिन्द हिन्द, जय हिन्द हिन्द-हू-तू-तू-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar

जय हिन्द, हिन्द, जय हिन्द, हिन्द
जय हिन्द हिन्द, जय हिन्द, हिन्द
जय हिन्द, हिन्द, जय हिन्द, हिन्द
जय हिन्द हिन्द, जय, जय हिन्द, हिन्द
जय हिन्द हिन्द, जय, जय हिन्द, हिन्द
गुरुमन्त्र मेरा, इतिहास मेरा
तहज़ीब मेरी, विश्वास मेरा
मेरी कर्मभूमि, मेरी जन्मभूमि,
ये हिन्द है हिन्दुस्तान मेरा
जय हिन्द, हिन्द, जय हिन्द, हिन्द
जय हिन्द, हिन्द, जय जय हिन्द, हिन्द

ये देश घना बरगद है मेरा
बरगद की घनी छांव के तले
मेरी फ़ाख़्ता दाना चुगती रहे
मेरे लोक-गीत का तोता पले
जोगी, सूफ़ी, दरवेश मेरा
ये मेरा वतन, ये देश मेरा
मेरी कर्मभूमि, मेरी जन्मभूमि,
ये हिन्द है, हिन्दुस्तान मेरा
जय हिन्द हिन्द…

इस देश की सारी धूप मेरी
इस देश की सारी छांव मेरी
नदियों का सारा पानी मेरा
हरियाली, गांव-गांव मेरा
पर भूख मेरी, बीमारी मेरी
जाती नहीं क्यूं बेकारी मेरी
जब भी कोई सूरज उगता है
हर बार ग्रहण लग जाता है
आकाश मेरा भर जाए तो
कोई मेघ चुरा ले जाता है
सम्मान मेरा, ये विरसा मेरा
लौटा दो मुझे, ये हिस्सा मेरा
जय हिन्द हिन्द…जय हिन्द हिन्द…जय हिन्द हिन्द…

गुरुमन्त्र मेरा, इतिहास मेरा
तहज़ीब मेरी, विश्वास मेरा
मेरी कर्मभूमि, मेरी जन्मभूमि,
ये हिन्द है हिन्दुस्तान मेरा
जय हिन्द, हिन्द, जय हिन्द, हिन्द
जय हिन्द, जय हिन्द, हिन्द

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