जमाने में सब कैसे आए हैं-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

जमाने में सब कैसे आए हैं-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

जमाने में सब कैसे आए हैं,
कौन अपनी गलती छिपाये है ।

किसी मां ने पैदा किया है इन्हें,
तो अनाथलय क्यो बढ़ते जाये है।।

कहां से आए किसे ये मिले,
कौन इन्हे पाले न शिकवे गिले ।

जमाने के सारे दर्द ये सहे,
अनाथ से एक दिन लायक बने ।।

सोचो किसका भरोसा इऩ्हे जिलाए हैं,
कि कौन कौन गलती छिपाये है।।

बच्चे अनाथ बढ़ते जाते यहां,
क्या अपनी गलती छिपाते यहां।।

इन्हें छोड़ते लाज न आयी,
इंसानियत ने कैसे मात है खायी।।

सोचो हम कैसे भुलाये हैं कि,
हम अपनी गलती छिपाए हैं ।।

जमाने में सब कैसे हैं
कौन अपनी गलती छिपाए हैं।।

किसी मां ने पैदा किया है इन्हे,
तो अनाथलय क्यो बढ़ते जाए है ।।

 

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