जब वसंत आकर मुसकाया- कविता -मनोहर लाल ‘रत्नम’ सहदेव-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Manohar Lal Ratnam Sahdev 

जब वसंत आकर मुसकाया- कविता -मनोहर लाल ‘रत्नम’ सहदेव-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Manohar Lal Ratnam Sahdev

जब वसंत आकर मुसकाया; पीलापन व्यवहार हुआ।
खेतों में फसलें चहकी हैं; यह वसंत त्योहार हुआ।।

पंचायत मेरे गाँव की; मौन तोड़ती है अपना
और यही चर्चा चौपाल पर; ये फसलें हैं धन अपना,
आज नया दरबार लगा है; सब मौलिक अधिकार हुआ।
जब वसंत आकर मुसकाया: पीलापन व्यवहार हुआ।।

सरसों के फूले खेतों पर, खुशी मनाकर हम हँस लें
कुन्दन सी बनकर लहकी है; देखो खेतों की फसलें,
बापू की लाठी को थामे, रमुआ मग्न विचार हुआ।
जब वसंत आकर मुसकाया, पीलापन व्यवहार हुआ।।

Leave a Reply