जब दुश्मन सरहद पर आये खून खौलने‌ लगता है-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

जब दुश्मन सरहद पर आये खून खौलने‌ लगता है-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

जब दुश्मन सरहद पर आये खून खौलने‌ लगता है।
प्रत्यंचा राम चढ़ाते है, भूतल हिलने लगता है।
मैं मृत्यु से नहीं डरता मृत्यु हमारी दासी है
भारत मां की जय कहकर दुश्मन की गर्दन काटी है।

राजनीति की कालिख में सब काला काला दिखता है।
वर्दी से लेकर हथियारों तक बस घोटाला दिखता है।

जब शहीदों की तस्वीरो पर कोई लौ जलती है।
है धरती मां रोती एक मां की सांसें बुझती है।।
तख्तो ताज पर जो बैठे हैं, वो फूल चढ़ाते आये हैं।
या हमें बताओ किसी नेता ने अपने लाल गंवाए हैं।

जिस दिन खादी के घर का लाल तिरंगे से लिपटा होगा।
उस दिन जो खींचे तिरंगे की डोर, गर्व में दर्द सिमटा होगा।।

शौर्य शिवाजी की धरती से राणा का भाला चलता है।
हल्दीधाटी की मिट्टी मे भारत का लाल मचलता है।
इस देश का चेतक भी अपना धर्म निभाता है।
बल पौरुष के इस रण में अभिमन्यु मारा जाता है

उस दिन दाग़ न होंगे दामन पर, गद्दारों की हस्ती मिट्टी होगी
जिस दिन नेताओं के दरबारो में, हल्दीघाटी सी मिट्टी होगी।।

नेताओं के मन मंदिर मे, जब भारत का आसन होगा।
तब न्याय, धर्म, ज्ञान, दया के पांवों का सिंहासन होगा
उस दिन फौजी के हाथों की लकीर मात खा जायेंगी।
जब संविधान के रथ पर जनता माधव को बैठायेगी।

तब गान्डीव अपने टंकार से दुश्मन मे आहि भरेगा।।
जब हर फौजी अर्जुन बनकर दुश्मन मे त्राहि करेगा।

तब भारत के बच्चे बच्चे को, इतिहास बताया जायेगा।
अश्लीलता को ताक चढ़ाकर अटृहास कराया जायेगा।
तब मां के गर्भ में ही बच्चा, भक्त प्रहलाद बन जायेगा।
मर्यादित पला बढ़ा तो वह, स्वमं आजाद बन जायेगा।।

तब कोई मां अपने बच्चो में महाराणा सा संस्कार भरेगी।
उस दिन ही कवियो की कविता उसका जयकार करेंगी।।

 

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