जब दर्द ओ अलम कम हुए अक्सर को चला-ग़ज़लें-ख़याल लद्दाखी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Khayal Ladakhi

जब दर्द ओ अलम कम हुए अक्सर को चला-ग़ज़लें-ख़याल लद्दाखी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Khayal Ladakhi

जब दर्द ओ अलम कम हुए अक्सर को चला
इस ज़ीस्त से यूँ ऊभ गया घर को चला
भटका मैं बहुत देर तलक दर को तेरे
आख़िर को सही क़ब्र ए मुकरर को चला

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