जब तुम कहते हो-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

जब तुम कहते हो-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

तुम कहते हो कि तुम्हें बारिश से प्यार है
लेकिन उसमें चलने के लिए
तुम छाता इस्तेमाल करते हो

तुम कहते हो कि तुम्हें सूरज से प्यार है
लेकिन जब वह चमकता है
तो तुम छाया तलाश करते हो

तुम कहते हो कि तुम्हें हवा से प्यार है
लेकिन जब वह आती है तो
तुम खिड़कियां बंद कर देते हो

इसलिए मैं डरता हूँ
जब तुम कहते हो
कि तुम मुझे प्यार करते हो !

 

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