जब चले जाएंगे लौट के सावन की तरह-ग़ज़लें -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

जब चले जाएंगे लौट के सावन की तरह-ग़ज़लें -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

जब चले जाएंगे लौट के सावन की तरह,
याद आएंगे प्रथम प्यार के चुम्बन की तरह ।

ज़िक्र जिस दम भी छिड़ा उनकी गली में मेरा
जाने शरमाए वो क्यों गांव की दुल्हन की तरह ।

कोई कंघी न मिली जिससे सुलझ पाती वो
जिन्दगी उलझी रही ब्रह्म के दर्शन की तरह ।

दाग मुझमें है कि तुझमें यह पता तब होगा,
मौत जब आएगी कपड़े लिए धोबन की तरह ।

हर किसी शख्स की किस्मत का यही है किस्सा,
आए राजा की तरह ,जाए वो निर्धन की तरह ।

जिसमें इन्सान के दिल की न हो धड़कन की ‘नीरज’
शायरी तो है वह अखबार की कतरन की तरह ।

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