जपि मन राम नामु सुखु पावैगो-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

जपि मन राम नामु सुखु पावैगो-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

जपि मन राम नामु सुखु पावैगो ॥
जिउ जिउ जपै तिवै सुखु पावै सतिगुरु सेवि समावैगो ॥१॥ रहाउ ॥
भगत जनां की खिनु खिनु लोचा नामु जपत सुखु पावैगो ॥
अन रस साद गए सभ नीकरि बिनु नावै किछु न सुखावैगो ॥१॥
गुरमति हरि हरि मीठा लागा गुरु मीठे बचन कढावैगो ॥
सतिगुर बाणी पुरखु पुरखोतम बाणी सिउ चितु लावैगो ॥२॥
गुरबाणी सुनत मेरा मनु द्रविआ मनु भीना निज घरि आवैगो ॥
तह अनहत धुनी बाजहि नित बाजे नीझर धार चुआवैगो ॥३॥
राम नामु इकु तिल तिल गावै मनु गुरमति नामि समावैगो ॥
नामु सुणै नामो मनि भावै नामे ही त्रिपतावैगो ॥४॥
कनिक कनिक पहिरे बहु कंगना कापरु भांति बनावैगो ॥
नाम बिना सभि फीक फिकाने जनमि मरै फिरि आवैगो ॥५॥
माइआ पटल पटल है भारी घरु घूमनि घेरि घुलावैगो ॥
पाप बिकार मनूर सभि भारे बिखु दुतरु तरिओ न जावैगो ॥६॥
भउ बैरागु भइआ है बोहिथु गुरु खेवटु सबदि तरावैगो ॥
राम नामु हरि भेटीऐ हरि रामै नामि समावैगो ॥७॥
अगिआनि लाइ सवालिआ गुर गिआनै लाइ जगावैगो ॥
नानक भाणै आपणै जिउ भावै तिवै चलावैगो ॥੮॥੧॥੧੩੦੮॥

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